
कोरोना संक्रमण के बीच शराब की दुकानें खोलने के मामले में सरकार और ठेकेदार आमने-सामने आ गए हैं। एक मई को आबकारी विभाग ने दुकानें खोलने का सर्कुलर कलेक्टरों को भेजा था, लेकिन इस आदेश पर शराब ठेकेदारों ने आपत्ति जता दी है। सोमवार को मुख्य सचिव आईसीपी केशरी के साथ ठेकेदारों की बैठक हुई। ठेकेदारों ने कहा- शराब दुकानें बंद रखी जाएं। बैठक चल रही थी, इसी दौरान अाबकारी विभाग ने दुकानें खेलने का आदेश जारी कर दिया। ठेकेदारों को इसकी जानकारी लगी तो उन्होंने जनहित में दुकानें बंद करने का ऐलान कर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि यदि प्रशासन दबाव बनाता है तो हम कोर्ट जाएंगे।
ठेकेदारों की तीन महत्वपूर्ण मांग
1.लाइसेंस की शर्तों को शिथिल किया जाए, क्योंकि चालू वर्ष में 2019-20 की तुलना में 25 फीसदी राशि बढ़ाई गई है।
2. डिपो से जितनी सप्लाई हो, दुकानों में जितनी खपत हो, उसी के हिसाब से ड्यूटी तय की जाए।
3. यदि फिर भी जरूरी हो तो सरकार दुकानों को अपने पजेशन में लेकर चलाए।
मीटिंग में उठे मुद्दे
ठेकेदार एसोसिएशन के उपाध्यक्ष राहुल जायसवाल ने कहा कि इस समय प्रशासनिक अमला, राजस्व के लोग व पुलिस कोरोना वायरस से संघर्ष में लगी है। ऐसे में शराब की दुकानें खुलती है तो कानून व्यवस्था का जिम्मा कौन संभालेगा। वैसे भी नीलामी के समय जो लाइसेंस की शर्तें थी वह दूषित हो चुकी हैं। इसे सरकार द्वारा शिथिल किया जाना चाहिए। इसका प्रजेंटेशन सरकार को दिया है। ठेकेदारों ने यह भी कहा कि दुकानों पर लंबी लाइन लगी और व्यवस्थाएं बिगड़ी तो जिम्मेदारी किसकी होगी। शराब एक जिले से दूसरे जिले में जाएगी, ऐसे में कोरोना फैलने का डर है। 25-50 लोग एक साथ दुकानों पर आ गए तो मुश्किल होगी। अधिकारियों ने कहा कि इस व्यवस्था का ध्यान रखा जाएगा। मांगों का जहां तक सवाल है तो इस पर निर्णय बाद में लेंगे।
जोनवार दुकानें खोलने की व्यवस्था
- भोपाल, इंदौर, उज्जैन में शराब दुकानें बंद रहेंगी। जबलपुर, धार, बड़वानी, पूर्वी निमाड़, देवास, ग्वालियर के ग्रामीण क्षेत्रों में दुकानें खुलेंगी
- शहडोल, श्योपुर, डिंडौरी, बुरहानपुर, हरदा, बैतूल, विदिशा, मुरैना एवं रीवा के कंटेनमेंट क्षेत्र को छोड़कर बाकी जगहों पर दुकानें खुलेंगी।
- ग्रीन जोन के सभी जिलों में सभी जगहों पर दुकानें संचालित होंगी।
फीस का पेंच
वित्तीय वर्ष 2020-21 के लिए 10,650 करोड़ रु. रेवेन्यू के साथ शराब दुकानें आवंटित हुई हैं। यह एक्साइज ड्यूटी एक अप्रैल से प्रभावी है, अभी दुकानें बंद हैं, इससे सरकार को 1000 करोड़ का नुकसान हुआ है। ठेकेदार नई शर्ताें के साथ ड्यूटी नहीं देना चाहते।
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